30 मिनट में लखनऊ से गुड़गांव डिलीवर हो गए कबाब, कस्टमर ने ठोक दिया केस, कंपनी को समन हुआ जारी


Zomato in Trouble: लखनऊ के मशहूर कबाब के दीवाने पूरे देश में फैले हुए हैं. लोग चाहते हैं कि गर्मागर्म कबाब उनकी थाली में जल्द से जल्द आ जाएं ताकि उनका असली स्वाद मिल सके. मगर, एक रोचक मामले में 30 मिनट में लखनऊ के कबाब की डिलीवरी होने पर एक कस्टमर को इतना गुस्सा आ गया कि उसने जोमाटो (Zomato) पर केस ठोक दिया. आइए जान लेते हैं आखिर जल्दी डिलीवरी को लेकर कस्टमर का पारा सातवें आसमान पर कैसे पहुंच गया. 

500 किमी दूर से कैसे आए फ्रेश कबाब 

यह घटना गुड़गांव में घटी. यहां के एक कस्टमर सौरव माल ने लखनऊ के कबाब ऑर्डर किए थे. जोमाटो ने उनका ऑर्डर मात्र 30 मिनट में डिलीवर कर दिया. यह देखकर उन्हें अविश्वास हुआ कि 500 किमी दूर स्थित लखनऊ से मात्र 30 मिनट में फ्रेश कबाब कैसे आ गए. इसके बाद उन्होंने कंपनी की जोमाटो लेजेंड्स (Zomato Legends) को आड़े हाथों ले लिया. उन्होंने जोमाटो के ऊपर लीगल केस कर दिया है. जोमाटो लेजेंड्स सर्विस में दावा किया जाता है कि कस्टमर को कोलकाता, हैदराबाद, लखनऊ, जयपुर, बेंगलुरु, मथुरा, चेन्नई और आगरा के नामी-गिरामी रेस्टोरेंट से गर्म और ताजा खाना उपलब्ध कराया जाएगा. 

जोमाटो के खिलाफ कोर्ट से जारी हुआ समन 

सौरव के ऑर्डर में चार सामान शामिल थे. इनमें से एक लखनऊ के कबाब थे और बाकी तीन दिल्ली में ही बनने वाली चीजों के ऑर्डर थे. उन्हें जब 30 मिनट में ही लखनऊ के कबाब मिल गए तो शक हुआ कि यह आर्डर लखनऊ से नहीं आया है. इन कबाब को पास के ही किसी रेस्टोरेंट से डिलीवर किया गया है. इसके बाद उन्होंने केस दायर करने का फैसला ले लिया. इसमें जोमाटो के क्लेम को झूठा बताया गया है. कोर्ट में वकीलों ने कहा कि 30 मिनट में लखनऊ से ताजा कबाब गुड़गांव में देना संभव नहीं है. इन्हें जोमाटो के किसी गोदाम में ही रखा गया था. इसके अलावा कबाब जोमाटो की पैकिंग में आए. उनके ऊपर किसी रेस्टोरेंट की पैकिंग नहीं थी. साकेत कोर्ट ने इस मामले में जोमाटो के खिलाफ समन जारी किया है. 

जयपुर से गुड़गांव 29 मिनट में डिलीवरी का दावा 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जयपुर से गुड़गांव तक जोमाटो का दावा है कि खाने का सामान 29 मिनट में डिलीवर हो जाएगा. हालांकि, साल 2022 के जोमाटो ब्लॉग में दावा किया गया था कि लेजेंड्स सर्विस के ऑर्डर अगले दिन डिलीवर होंगे. इससे पता चल रहा है कि जोमाटो के विज्ञापनों में गलत दावा किया जा रहा है. केस में याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जोमाटो लेजेंड्स सर्विस के तहत भ्रामक दावों पर रोक लगाई जाए.

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