2047 तक बदल जाएगी भारत की सूरत, 1 अरब से ज्यादा होगी मिडिल क्लास की जनसंख्या

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भारत पिछले कुछ सालों के दौरान प्रमुख वैश्विक आर्थिक ताकत के रूप में उभरा है. अभी भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि ब्रिटेन और फ्रांस के बाद अगले कुछ सालों में भारत जीडीपी के मामले में जर्मनी और जापान से भी आगे निकल जाएगा. इस तरह भारत जल्दी ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. भारत की इस कहानी में मिडिल क्लास का बड़ा योगदान है.

आबादी का इतना हिस्सा मिडिल क्लास

बिजनेस टुडे मैगजीन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2047 में जब भारत की आजादी के 100 साल पूरे होंगे, भारत की कुल आबादी में मिडिल क्लास की हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी. वित्त वर्ष 2005 में भारत की कुल आबादी में मिडिल क्लास का हिस्सा महज 14 फीसदी था. देश में मिडिल क्लास का तेजी से उभार हो रहा है और आने वाले सालों में इसमें तेजी आने की उम्मीद है.

1 अरब से ज्यादा हो जाएगी संख्या

अभी भारत में मिडिल क्लास का हिस्सा काफी कम है. प्राइस आइस 360 सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 में भारत की कुल आबादी में मिडिल क्लास का हिस्सा 30 फीसदी था. यह अगले 10 सालों यानी वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 47 फीसदी और वित्त वर्ष 47 तक 61 फीसदी हो जाने की उम्मीद है. दूसरे शब्दें में कहें तो जब भारत आजादी के 100 साल पूरे कर रहा होगा, तब भारत में मिडिल क्लास के लोगों की संख्या 1 अरब से ज्यादा हो जाएगी.

इस तरह बढ़ेगी प्रति व्यक्ति आय

जैसे-जैसे भारत में मिडिल क्लास के लोगों की संख्या बढ़ेगी, भारत की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ती जाएगी. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, अभी भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 2,500 डॉलर है, जो भारतीय करेंसी में करीब 2 लाख रुपये होती है. यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष का है. एसबीआई रिसर्च के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति आय 2046-47 तक बढ़कर 12,400 डॉलर पर पहुंच जाएगी. यानी 2047 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 14.9 लाख रुपये हो जाएगी.

देश की प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने में सबसे प्रमुख योगदान देने वाले मिडिल क्लास के साथ-साथ नीचे के वर्गों में शामिल लोगों की भी आय में इजाफा होगा. मध्यम वर्ग को देखें तो 2047 तक उसमें शामिल होने वाली 61 फीसदी आबादी की सालाना इनकम 5 लाख रुपये से 30 लाख रुपये हो जाने वाली है.

10 साल में इतने बढ़े रिटर्न

इन आंकड़ों की पुष्टि इनकम टैक्स के डेटा से भी होती है. आकलन वर्ष 2023-24 में इनकम टैक्स का नया रिकॉर्ड बना है. इस बार 7.09 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किए गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. आज से 10 साल पहले आईटीआर भरने वालों की संख्या 1.50 करोड़ के आस-पास थी. मतलब पिछले 10 सालों में इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या 4 गुने से ज्यादा बढ़ी है.

तेजी से बढ़ रहा है टैक्सेबल बेस

एसबीआई रिसर्च की मानें तो वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान वर्कफोर्स का सिर्फ 59.1 फीसदी हिस्सा ही टैक्सेबल बेस में शामिल था. वित्त वर्ष 2047 तक इनका हिस्सा बढ़कर 78 फीसदी पर पहुंच जाएगा और 56.5 करोड़ लोग टैक्सेबल बेस के दायरे में आ जाएंगे. एसबीआई रिसर्च के अनुसार, भारत के लोग लगातार उच्च ब्रैकेट में शिफ्ट हो रहे हैं और अच्छी बात है कि इस बदलाव की रफ्तार भी लगातार बढ़ रही है.

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