भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने की डेविड वॉर्नर की तारीफ, कहा- ‘वह सिर्फ वीरेंद्र सहवाग से पीछे

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AUS vs PAK 3rd Test: ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच टेस्ट सीरीज चल रही है, जो डेविड वॉर्नर के करियर की आखिरी टेस्ट सीरीज है. इस सीरीज का पहला मैच पर्थ में और दूसरा मैच मेलबर्न में खेला गया था. इन दोनों टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने जीत हासिल करके सीरीज पर कब्जा कर लिया है. अब बारी तीसरे टेस्ट मैच की है, जो सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाएगा. यह मैदान डेविड वॉर्नर का घरेलू मैदान है, और इसी मैदान पर वॉर्नर अपने करियर का आखिरी टेस्ट मैच खेलने वाले हैं. 

ग्रेग चैपल ने सहवाग से की वॉर्नर की तुलना

वॉर्नर के आखिरी टेस्ट मैच की शुरुआत होने से पहले ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व कोच रह चुके ग्रेग चैपल ने अपने देश के इस विस्फोटक बल्लेबाज की खूब तारीफ की है. उन्होंने अपने बयान में वॉर्नर की तारीफ करते हुए वीरेंद्र सहवाग की भी तारीफ की है.

उन्होंने सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड के अपने कॉलम में लिखा कि, “डेविड ‘सैंडपेपर गेट’ घटना को कभी याद नहीं रखेंगे. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट पर लगे उस दाग के जिम्मेदार सिर्फ डेविड वॉर्नर नहीं थे. अपने समय के दौरान ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की सफलता में वार्नर की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता. क्रिकेट के इस आधुनिक युग में, सिर्फ वीरेंद्र सहवाग ही सलामी बल्लेबाज के रूप में वार्नर से अधिक विशानकारी बल्लेबाज रहे हैं.”

स्ट्राइक रेट के मामले में सबसे आगे सहवाग

आपको बता दें कि टेस्ट फॉर्मेट में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट से रन बनाने के मामले में सबसे ऊपर भारत के वीरेंदर सहवाग मौजूद हैं, और दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर का नाम मौजूद है. यह आंकड़े कम से कम 3000 अंतरराष्ट्रीय टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाजों के हैं.  इस लिस्ट में सबसे ऊपर वीरेंदर सहवाग का नाम है, जिन्होंने अपने टेस्ट करियर में 22 शतकों के साथ 83.10 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे. वहीं, दूसरे नंबर पर डेविड वॉर्नर का नाम है, जिन्होंने 25 शतकों के साथ अपने टेस्ट करियर में 70.56 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं. 

ग्रेग चैपल ने अपने कॉलम में आगे लिखा कि, “एक विनाशकारी सलामी बल्लेबाज के प्रभाव को कभी भी कम नहीं आंका जा सकता है, और मेरा दृढ़ विश्वास है कि चयनकर्ता वार्नर की जगह लेने के लिए उन्हीं की तरह समान क्षमताओं वाले किसी खिलाड़ी की तलाश कर रहे होंगे. अन्यथा ऑस्ट्रेलिया को पिछले एक दशक से जो शानदार फायदा हुआ है, वो सब गंवाने का जोखिम भी बढ़ होगा.

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