बजट में कागज, पेपरबोर्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 25 फीसदी की जाए, पेपर मैन्यूफैक्चर एसोसिएशन की मांग

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Budget 2024: साल 2024 के आम लोकसभा चुनाव से पहले आखिरी बजट पेश होने में केवल 9 दिन बाकी रह गए हैं. देश भर से वित्त मंत्रालय और बजट तैयार करने वाली टीम को बजट के लिए मांग और उम्मीदें मिल रही हैं. इसी कड़ी में पेपर और पेपरबोर्ड मैन्यूफैक्चर्रर्स भी शामिल हैं. जानिए आखिर उन्होंने सरकार से क्या मांग की है.

घरेलू कागज और पेपरबोर्ड मैन्यूफैक्चर्रर्स ने आगामी आम बजट में कागज उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 25 फीसदी करने और गुणवत्ता नियंत्रण आदेश लगाने की मांग की है. भारतीय कागज विनिर्माता संघ (आईपीएमए) ने सोमवार को एक बयान में यह मांग करते हुए कहा कि सस्ते आयात को हतोत्साहित करने के लिए ऐसा करना जरूरी है.

आईपीएमए ने सरकार को दे दिया है ज्ञापन

संगठन ने कहा कि उसने बजट से पहले सरकार को अपने ज्ञापन में कागज और पेपरबोर्ड के आयात पर मूल सीमा शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने का आग्रह किया है. आईपीएमए ने कहा कि इन उत्पादों पर भारत की डब्ल्यूटीओ सीमा दर 40 फीसदी है.

क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर जारी करने की हुई है मांग

ज्ञापन में भारतीय उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और देश में घटिया उत्पादों के आयात की जांच करने के लिए विभिन्न श्रेणियों के कागज के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश या क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (क्यूसीओ) जारी करने को भी कहा गया है.

कागज और पेपरबोर्ड के लिए की गई ये मांग

आईपीएमए के अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने सरकार से मौजूदा एफटीए (आसियान, दक्षिण कोरिया और जापान) की समीक्षा करते समय और नए एफटीए तैयार करते समय कागज और पेपरबोर्ड को नकारात्मक सूची में रखने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क में किसी भी बढ़ोतरी से एफटीए के तहत देश में आने वाले शुल्क मुक्त आयात पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग शुल्क भी लगाया जाए- आईपीएमए

उन्होंने कहा कि कागज की विभिन्न श्रेणियों के आयात पर उपयुक्त सुरक्षा, एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग शुल्क शीघ्रता से लगाया जाना चाहिए. खास तौर से व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) की सिफारिश के बाद ऐसा तुरंत करना चाहिए.

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