ईरान और इजरायल के बीच बढ़ा तनाव, महंगी EMI से राहत की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी

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EMI Relief Update: महंगी ईएमआई से परेशान लोग इस साल की दूसरी छमाही में सस्ते कर्ज से राहत मिलने की उम्मीदें पाले हुए थे. लेकिन पिछले हफ्ते अमेरिका में मार्च महीने में महंगाई दर में उछाल और ईरान के इजरायल पर हमले के बाद से सस्ती ईएमआई की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. 12 अप्रैल 2024 को सांख्यिकी मंत्रालय ने डेटा जारी कर बताया कि मार्च महीने में खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी से घटकर 4.85 फीसदी पर आ गई और ये आरबीआई के टोलरेंस बैंड के कुछ ही फासले की दूरी पर है. 

खुदरा महंगाई दर भले की घट गई हो. लेकिन खाद्य महंगाई दर अभी भी 8.52 फीसदी बनी हुई है और दालों की महंगाई दर सबसे ज्यादा आम लोगों को परेशान कर रही है. वैश्विक तनाव के चलते कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. लेकिन ईरान के इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल से हमले के बाद ये माना जा रहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में आग लग सकती है और ये 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है. ऐसे में इसका बड़ा खामियाजा भारत को उठाना पड़ सकता है. महंगाई से राहत मिलने की उम्मीदें धरी की धरी रह सकती हैं.  

फिलहाल लोकसभा चुनावों के चलते भले ही अगले दो महीने तक कच्चे तेल के दामों में उबाल के बाद भी पेट्रोल डीजल की खुदरा कीमतें ना बढ़े लेकिन चुनावों के खत्म होने के बाद पेट्रोलियम कंपनियां सरकार पर दाम बढ़ाने की मंजूरी देने के लिए दबाव बढ़ा सकती हैं. ऐसा हुआ तो महंगाई बढ़ना देश में लाजिमी है. 

हाल ही में मॉनिटरी पॉलिसी का एलान करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने महंगाई को लेकर कहा था कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अनिश्चितता से महंगाई बढ़ने का दबाव बना रहेगा. उन्होंने दालों के साथ कुछ खास साग-सब्जियों की कीमतों पर निगरानी बनाये रखने पर जोर दिया था. सामान्य से ज्यादा तापमान रहने के साथ मौसम में बदलाव के चलते घरेलू और इंटरनेशनल खाद्य वस्तुओं की कीमतों के ऊपर जाने के जोखिम को लेकर भी उन्होंने अपने आउटलुक में आगाह किया. आरबीआई गवर्नर ने कच्चे तेल की कीमतों के साथ वैश्विक तनाव के चलते कमोडिटी प्राइसेज को लेकर भी सर्तक रहने की सलाह दी थी. और जिस बात की आशंका वे जता रहे थे वो सच साबित हुई. 

आरबीआई गवर्नर के इस बयान के कुछ ही दिनों बाद ईरान के इजरायल पर हमले से बढ़े तनाव के बाद जो हालात पैदा हुए हैं वो भारत की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं. यूक्रेन और रूस का युद्ध थमा नहीं है. उसपर से अब ईरान और इजरायल के बीच का तनाव फिर से महंगाई को बढ़ा सकती है. ऐसे में महंगी ईएमआई से परेशान जो लोग ब्याज दरों में कमी की उम्मीदें पाले हुए थे उनकी उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिरता नजर आ रहा है. जिसके संकेत शेयर बाजार भी दे रहा है जहां सोमवार 15 अप्रैल 2024 के कारोबारी सत्र में तेज गिरावट देखने को मिली है.  

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