आपकी सोच से भी ज्यादा लोग हो रहे हैं कार्डियक डिप्रेशन का शिकार, जानिए इसके रिस्क

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Cardiac Depression: कार्डियक डिप्रेशन यानी हृदय अवसाद अब खास और कम सुनाई देने वाली बीमारी नहीं रही है. हार्ट संबंधी किसी भी तरह की बीमारी और इसके इलाज से संबंधित लोगों को कार्डियक डिप्रेशन आम बात हो गई है.हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि आमतौर ये डिप्रेशन  दिल की सर्जरी, वाल्व सर्जरी, पेसमेकर लगाने के बाद ये आमतौर पर मुखर हो जाता है. खतरे की बात ये है कि इसके मरीज तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. चलिए इस बारे में जानते हैं.

क्या है कार्डियक डिप्रेशन 
दिल की बीमारी से जूझ रहे और दिल की बीमारी का इलाज करवा रहे लोगों को होने वाला डिप्रेशन कार्डियक डिप्रेशन कहलाता है. डॉक्टर कहते हैं कि दिल का इलाज करवा रहे लोग जब चिंता, बेचैनी, उदासी में घिरे होते हैं तो वो अवसाद का शिकार हो जाते हैं.

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यह अप्राकृतिक बेचैनी, उदासी या खुद के प्रति सहानुभूति से जुड़ा मानसिक तनाव हो सकता है. जब कोई मरीज कार्डियक डिप्रेशन का शिकार होता है तो वो आस पास कम लोगों से बात करना कम कर देता है. उसकी भूख भी कम हो जाती है. अगर कोई उनसे उनकी बीमारी पर बात करना चाहता है तो वो चिड़चिड़े हो जाते हैं.

कार्डियक डिप्रेशन को लेकर गलतफहमी
कार्डियक डिप्रेशन के मरीजों को दरअसल इस बात की गलतफहमी हो जाती है कि वो थक गए हैं. जबकि ऐसा नहीं है. इस दौरान डाइट से जुड़े नियम और प्रतिबंधों को सोच कर भी कुछ लोग अवसाद में आ जाते हैं. जबकि ऐसा नहीं है. उनको लगता है कि उनका जीवन नीरस हो गया है. वो कभी इस बीमारी से आजाद नहीं हो पाएंगे. ऐसी गलतफहमियां कार्डियक डिप्रेशन को बढ़ाती है.

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कार्डियक डिप्रेशन से बचाव है संभव
डॉक्टर कहते हैं कि दिल की बीमारी के रिस्क फैक्टर का पता लगाकर, हाई बीपी, डायबिटीज और मोटापे को कंट्रोल किया जा सकता है. इससे दिल से जुड़े रिस्क कम हो सकते हैं. इसके साथ साथ कार्डियक डिप्रेशन के मरीज के आस पास पारिवारिक माहौल, इमोशनल सपोर्ट, सही डाइट और कंसलटेशन के जरिए इसे ठीक किया जाना संभव है जिससे मरीज अपनी डेली लाइफ को बिना किसी रिस्क के जी सकता है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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