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<p>घरेलू शेयर बाजार में इन दिनों भारी मुनाफावसूली देखने को मिल रही है. दोनों प्रमुख सूचकांकों बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी ने जुलाई महीने में अपना नया ऑल टाइम हाई बनाया है. उसके बाद से बाजार में निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं. हाई लेवल पर मुनाफा वसूल करने में घरेलू निवेशक सबसे आगे हैं, जिससे लिस्टेड कंपनियों में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट आई है.</p>
<h3>जुलाई में बाजार ने बनाया रिकॉर्ड</h3>
<p>बीएसई सेंसेक्स अभी 65,953.48 अंक पर है. आज लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है. इससे पहले बाजार लगातार मुनाफावसूली की चपेट में था. बाजार ने जुलाई महीने के दौरान अपना हाई लेवल छुआ था. सेंसेक्स 67,619.17 अंक तक पहुंच गया था, जबकि एनएसई निफ्टी ने 19,991.85 अंक के स्तर को छुआ था. इसी कारण बाजार में स्वाभाविक मुनाफावसूली होने लग गई.</p>
<h3>सात तिमाही में पहली बार आई कमी</h3>
<p>उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लिस्टेड कंपनियों में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है. एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी में यह गिरावट पिछली सात तिमाहियों में पहली बार आई है. इसमें खुदरा निवेशकों के साथ-साथ घरेलू संस्थागत निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की हिस्सेदारी भी शामिल है.</p>
<h3>इस तरह से कम हुआ है शेयर</h3>
<p>ईटी की एक खबर में प्राइम इंफो बेस डॉट कॉम के हवाले से बताया गया है कि 30 जून को समाप्त हुई तिमाही में एनएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों में घरेलू निवेशकों की सम्मिलित हिस्सेदारी कम होकर 25.50 फीसदी पर आ गई. इससे पहले घरेलू निवेशकों की यह हिस्सेदारी 31 मार्च 2023 को समाप्त हुई तिमाही में 25.73 फीसदी रही थी. लिस्टेड कंपनियों में घरेलू निवेशकों की सम्मिलित हिस्सेदारी 30 सितंबर 2021 को समाप्त हुई तिमाही के बाद लगातार बढ़ रही थी. सितंबर 2021 तिमाही में हिस्सेदारी 22.40 फीसदी पर थी.</p>
<h3>इन कारणों से कम हुई हिस्सेदारी</h3>
<p>आंकड़ों के अनुसार, लिस्टेड कंपनियों में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी में कमी आने का प्रमुख कारण घरेलू बाजार में हो रही बिकवाली है. पिछले कुछ महीनों के दौरान न सिर्फ घरेलू खुदरा निवेशकों ने बिकवाली की है, बल्कि म्यूचुअल फंडों ने भी शेयर बेचे हैं और सबसे बड़े निवेशकों में से एक सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी ने भी बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की है.</p>
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