मां दुर्गा के हाथ में है त्रिशूल, चक्र और कमल जैसी कई चीजें, जो देते हैं शक्ति को सहेजने की प्र

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Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे बुराई पर अच्छाई के विजय के तौर पर मनाया जाता है. नवरात्रि मां दुर्गा की पूजा और शक्ति की अराधना का पर्व है, जिसे पूरे 9 दिनों तक धूमधाम के साथ मनाया जाता है और विजयदशमी पर इसका समापन होता है.

इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 15 अक्टूबर से हो चुकी है, जिसका समापन 24 अक्टूबर 2023 को हो जाएगा. मां दुर्गा को हिंदू धर्म में शक्ति की ऐसी देवी माना गया है, जो बुराईयों का नाश और असुरों का संहार करती हैं.

अष्टभुजाधारी हैं मां दुर्गा

मां दुर्गा का जन्म असुरों के संहार के लिए हुआ. मां दुर्गा सिंह की सवारी करती हैं और उनके 8 हाथ हैं. इसलिए देवी दुर्गा को अष्टभुजाधारी और महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है. मां के 8 हाथों में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र हैं. सभी देवताओं ने देवी दुर्गा को अपने सर्वोत्तम हथियार देकर उन्हें संहाररूपिणी के रूप में अलंकृत किया था. इन हथियारों को प्राप्त कर मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का संहार किया था. इसलिए मां दुर्गा के हाथों में इन अस्त्र-शस्त्र को शक्ति का प्रतीक माना गया है, जो शिक्षाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं. आइये जानते हैं इनके बारे में:-

  • सुदर्शन चक्र: मां दुर्गा की तर्जनी में सुदर्शन चक्र है. भगवान श्रीकृष्ण ने मां दुर्गा को अपना सबसे प्रिय अस्त्र दिया था, जो इस बात का प्रतीक है कि, पूरी दुनिया उनके अधीन है और संपूर्ण सृष्टि का संचालन मां स्वयं कर रही हैं. साथ ही सुदर्शन चक्र कर्तव्य और धार्मिकता का भी प्रतीक है, जिससे हमें जीवन में अपने कर्तव्यों को निभाने की सीख मिलती है.
  • शंख: मां दुर्गा के पहले ऊपरी हाथ में शंख है, जिसे खुशी का प्रतीक माना गया है. इसकी ध्वनि से स्वर्ग, नरक और नश्वर की सभी बुरी शक्तियां भयभीत हो जाती हैं. मां दुर्गा को यह शंख वरुण देव से प्राप्त हुआ है.
  • त्रिशूल: मां दुर्गा के चौथे बाएं निचले हाथ में त्रिशूल है, जोकि उनका सबसे शक्तिशाली हथियार है. इसी त्रिशूल से मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था. भगवान शिव ने मां दुर्गा को अपना त्रिशूल दिया, जिसे साहस का प्रतीक माना जाता है. त्रिशूल का तीन भाग तीन गुणों की सीख मिलती है जो इस प्रकार है- सत्य, तम और रज.
  • तीर धनुष: मां दुर्गा दूसरे बाएं निचले हाथ में तीर धनुष धारण किए हुए हैं जो ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है. इसका प्रयोग मां ने असुरों से युद्ध करते समय किया था. मां दुर्गा को पवन देव से तीर धनुष प्राप्त हुआ था.
  • तलवार: मां दुर्गा के दूसरे दाहिने निचले हाथ में तलवार है, जोकि बुराई के उन्मूलन और बुद्धि का प्रतीक है. कहा जाता है कि, भगवान गणेश ने मां दुर्गा को तलवार भेंट की थी.
  • कमल फूल: देवी दुर्गा के तीसरे निचले बाएं हाथ में कमल का फूल है, जोकि वैराग्य का प्रतीक है. इससे हमें यह सीख मिलती है कि, मानव को बाहरी दुनिया से लगाव के बिना दुनिया में रहना चाहिए. जिस प्रकार कमल का फूल कीचड़ में खिलकर भी उससे अछूता रहता है. ठीक इसी तरह मनुष्यों को भी संसार में रहकर सांसारिक कीचड़, वासना, लोभ और लालच से दूर अपनी गुणवत्ता को विकसित करना चाहिए.
  • गदा: मां दुर्गा के दाहिने निचले हाथ में गदा है. मां दुर्गा को यमराज ने गदा प्रदान की थी, जिसे कालदंडा कहा जाता है. इसे शक्ति, निष्ठा, प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना गया है.
  • सिंह की सवारी: मां सिंह की सवारी करती हैं, जिसे उग्रता और हिंसक प्रवृत्तियों का प्रतीक माना जाता है. माता के सिंह पर सवार होने का अर्थ यह है कि, जो उग्र या हिंसक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पा सकता है, वही शक्ति है.
  • ऊं: देवी दुर्गा एक हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इस हाथ में ‘ऊं’ इंगित है. ऊं परमात्मा का बोध कराता है और इसी में सभी शक्तियां निहित है.

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