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जैसे ही तीसरी मुट्ठी चावल खाने को श्री कृष्ण ने हाथ बढ़ाया उनका हाथ उनकी पटरानी रुक्मणी ने थाम लिया. सभी लोग विस्मय से रुकमणी को देखने लगे, कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया. तब रुक्मणी ने कहा प्रभु आपने दो मुट्ठी में 2 लोक तो दान कर दिए हैं. अब तीसरा मत कीजिए, वरना हम सब और आपकी प्रजा कहां जाएंगे. इस पर कृष्ण रुक गए और सुदामा को प्रेम पूर्वक उनके घर के लिए, वस्त्र आभूषण के साथ विदा किया.
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